Санскритско-хинди-русский разговорник (отрывок)

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संस्कृतवाक्यप्रबोधः

Несколько фраз

разговорного санскрита

Автор:

दयानन्द सरस्वती dayānanda sarasvatī

Перевод:

Леонченко В.В.

Содержание

भूमिका

Вступление.

मैंने इस संस्कृतवाक्यप्रबोध पुस्तक को बनाना आवश्यक इसलिये समझा है कि शिक्षा को पढ़ के कुछकुछ संस्कृत भाषण का आना विद्यार्थियों को उत्साह का कारण है ।

Я решил написать эту книгу для того, чтобы заинтересовать студентов в изучении санскрита.

जब वे व्याकरण के सन्धिविषयादि पुस्तकों को पढ़ लेंगे तो उनको स्वतः ही संस्कृत बोलने का बोध हो जायेगा, परन्तु यह जो संस्कृत बोलने का अभ्यास प्रथम किया जाता है, वह भी आगेआगे संस्कृत पढ़ने में बहुत सहायता करेगा ।

Изучая санскритскую грамматику, они, читая эту книгу, уже начинают разговаривать на санскрите, что может повысить их интерес и энтузиазм в учении.

जो कोई व्याकरणादि ग्रन्थ पढ़े बिना भी संस्कृत बोलने में उत्साह करते हैं वे भी इसको पढ़कर व्यवहारसम्बन्धी संस्कृत भाषा को बोल और दूसरे का सुनके भी कुछकुछ समझ सकेंगे ।

Для тех же, кто хотя и не изучил еще грамматику, но с интересом читает эту книгу, легче будет изучать её, произнося фразы на родственном языке и слушая речь других.

जब बाल्यावस्था से संस्कृत के बोलने का अभ्यास होगा तो उसको आगेआगे संस्कृत बोलने का अभ्यास अधिकअधिक होता जायेगा ।

Тем больше будет практики разговорного санскрита, если учишься говорить на нем с детства.

और जब बालक भी आपस में संस्कृत भाषण करेंगे तो उनको देखकर जवान वृद्ध मनुष्य भी संस्कृत बोलने में रुचि अवश्य करेंगे ।

Когда взрослые увидя как дети разговаривают между собой на санскрите, это так же подтолкнет их к его изучению.

जहां कहीं संस्कृत के नहीं जानने वाले मनुष्यों के सामने दूसरे को अपना गुप्त अभिप्राय समझाना चाहें तो संस्कृत भाषण काम आता है ।

Также, в тех ситуациях, когда вы хотите сообщить свое тайное намерение среди людей, не знающих санскит, такое знание также будет полезно вам.


जब इसके पढ़ाने वाले विद्यार्थियों को ग्रन्थस्थ वाक्यों को पढ़ावें उस समय दूसरे वैसे ही नवीन वाक्य बनाकर सुनाते जावें, जिससे पढ़नेवालों की बुद्धि बाहर के वाक्यों में भी फैल जाय ।

Работая с учебными фразами и составляя на их основе новые предложения, учащиеся тренируют свой разум.


और पढ़नेवाले भी एक वाक्य को पढ़ के उसके सदृश अन्य वाक्यों की रचना भी करें कि जिससे बहुत शीघ्र बोध हो जाय, परन्तु वाक्य बोलने में स्पष्ट अक्षर, शुद्धोच्चारण, सार्थकता, देश और काल वस्तु के अनुकूल जो पद जहाँ बोलना उचित हो, वहीं बोलना और दूसरे के वाक्यों पर ध्यान देकर सुनके समझना ।

Читатель должен не только выучить и записать фразы из книги, но преобразовать их, используя подходящие слова, употребляя их в соответствующей грамматической форме, так чтобы новые фразы были построены правильно и воспринимались на слух.

प्रसन्नमुख, धैर्य, निरभिमान और गम्भीरतादि गुणों को धारण करके क्रोध, चपलता, अभिमान और तुच्छादि दोषों से दूर रहकर अपने वा किसी के सत्य वाक्य का खण्डन और अपने अथवा किसी के असत्य का मण्डन कभी न करें और सर्वदा सत्य का ग्रहण करते रहें ।

Избегайте гнева, хитрости, гордости, мелочности; сохраняйте терпение, самоуважение, вдумчивость, радость; никогда не противоречьте себе, своему внутреннему голосу, будьте самими собой; никогда не обращайте внимания на свою или чью-то неправду; всегда следуйте истине.


इस ग्रन्थ में संस्कृतवाक्य प्रथम और उसके सामने भाषार्थ इसलिये लिखा है कि पढ़नेवालों को सुगमता हो और संस्कृत की भाषा और भाषा का संस्कृत भी यथायोग्य बना सकें ।

Эта книга была написана ради языка санскрита дабы сделать его доступнее для всех.

दयानन्द सरस्वती

Даянанда Сарасвати

काशी, फा०शु० ११ (१९३६ वि०)

Каши. 1936 г.

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गुरुशिष्यवार्तालापप्रकरणम्

guruśiṣyavārtālāpaprakaraṇam

Разговоры между учеником и учителем

संस्कृत ХИНДИ + РУССКИЙ
भो शिष्य उत्तिष्ठ प्रातःकालो जातः । bho śiṣya uttiṣṭha prātaḥkālo jātaḥ हे शिष्य ! उठ, सवेरा हुआ ।

О, Ученик, просыпайся! Доброе утро!

उत्तिष्ठामि । uttiṣṭhāmi उठता हूँ । Встаю.
अन्ये सर्वे विद्यार्थिन उत्थिता न वा ?

anye sarve vidyārthina utthitā na vā ?

और सब विद्यार्थी उठे वा नहीं ?

Не встали ли все другие жаждущие знаний?

अधुना तु नोत्थिताः खलु

adhunā tu notthitāḥ khalu

अभी तो नहीं उठे हैं ।

сейчас еще не встали.

तानपि सर्वानुत्थापय उन सब को भी उठा दे ।

все они должны быть подняты

सर्व उत्थापिताः सब उठा दिये । все поднялись
सम्प्रत्यस्माभिः किं कर्त्तव्यम् ?

sampratyasmābhiḥ kiṁ karttavyam ?

इस समय हमको क्या करना चाहिये ?

что должно быть нами сделано?

आवश्यकं शौचादिकं कृत्वा सन्ध्यावन्दनम् ।

āvaśyakaṁ śaucādikaṁ kṛtvā sandhyāvandanam

आवश्यक शरीरशुद्धि करके सन्ध्योपासना ।

Обязательно умывшись и собравшись, нужно почтить Сандхйю- богиню утренней зори.

आवश्यकं कृत्वा सन्ध्योपासिता‍ऽतः परमस्माभिः किं करणीयम् ?

āvaśyakaṁ kṛtvā sandhyopāsitā paramasmābhiḥ kiṁ karaṇīyam

आवश्यक कर्म करके सन्ध्योपासन कर लिया । इसके आगे हमको क्या करना चाहिये ?

Что надлежит сделать нам после почитания Сандхйи- богини зари?

अग्निहोत्रं विधाय पठत ।

agnihotraṁ vidhāya paṭhata

अग्निहोत्र करके पढ़ो ।

Прочесть (выполнить) правильную агнихотру (обряд призывания, почтения Агни)

पूर्वं किं पठनीयम ?

pūrvaṁ kiṁ paṭhanīyam

पहिले क्या पढ़ना चाहिये ?

что я должен прочесть (выучить, сделать) в первую очередь?

वर्णोच्चारणशिक्षामधीध्वम् ।

varṇoccāraṇaśikṣāmadhīdhvam =

varṇa uccāraṇa śikṣām adhīdhvam

वर्णोच्चारणशिक्षा को पढ़ो ।

Вами должен быть исполнен (выучен, повторен, спет) алфавит.

पश्चात्किमध्येतव्यम् ?

Paścātkimadhyetavyam? =

paścāt kim adhyetavyam ?

पीछे क्या पढ़ना चाहिये ?

что должно быть изучено мною потом?

किंचित्संस्कृतोक्तिबोधः क्रियताम् ।

kiṁcitsaṁskṛtoktibodhaḥ kriyatām =

kiṁcit saṁskṛta uktibodhaḥ kriyatām

कुछ संस्कृत बोलने का ज्ञान किया जाय ।

следует изучить некоторые санскритские высказывания

पुनः किमभ्यसनीयम् ?

punaḥ kimabhyasanīyam ? =

punaḥ kim abhyasanīyam ?

फिर किसका अभ्यास करना चाहिये ?

какие упраженения должны быть выполнены?

यथायोग्यव्यवहारानुष्ठानाय प्रयुतध्वम् ।

yathāyogyavyavahārānuṣṭhānāya prayutadhvam =

yathā yogya vyavahāra anuṣṭha anaya prayutadhvam

यथोचित व्यवहार करने के लिये प्रयत्न करो ।

вам следует придерживаться благонравного поведения

कुतोऽनुचितव्यवहार कर्तुर्विद्यैव न जायते ।

kuto.nucitavyavahāra karturvidyaiva na jāyate

क्योंकि उल्टे व्यवहार करनेहारे को विद्या ही नहीं होती ।

не рождается знание при ненадлежащем усердии и правильном поведении

को विद्वान् भवितुर्महति ?

ko vidvān bhaviturmahati ?

कौन मनुष्य विद्वान् होने के योग्य होता है ?

как же стать великим ученым?

यः सदाचारी प्राज्ञः पुरुषार्थी भवेत् ।

yaḥ sadācārī prājñaḥ puruṣārthī bhavet

जो सत्याचरणशील, बुद्धिमान्, पुरुषार्थी हो ।

прозорливецем да будет тот, что прилежен, целеустремлен и благонравен.

कीदृशादाचार्याधीत्य पण्डितो भवितुं शक्नोति ?

kīdṛśādācāryādhītya paṇḍito bhavituṁ śaknoti

कैसे आचार्य से पढ़ के पण्डित हो सकता है ?

Какие воззрения, науки, изучал учитель, чтобы стать столь мудрым?

अनूचानतः ।

anūcānataḥ

पूर्ण विद्वान वक्ता से ।

во всём следовал своему учителю; стал знатоком вед и веданг, так что может их повторить; следовал принципам истинного благонравия.

अथ किमध्यापयिष्यते भवता ?

atha kimadhyāpayiṣyate bhavatā?

अब आप इसके अनन्तर हमको क्या पढ़ाइयेगा ?

и так, чему Вы научите нас?

अष्टाध्यायी महाभाष्यम् ।

aṣṭādhyāyī mahābhāṣyam

अष्टाध्यायी और महाभाष्य ।

восьми великим комментариям- грамматике Панини.

किमनेन पठितेन भविष्यति ?

kimanena paṭhitena bhaviṣyati

इसके पढ़ने से क्या होगा ?

что будет после того, как мы изучим это?

शब्दार्थसम्बन्धविज्ञानम् ।

śabdārthasambandhavijñānam

शब्द अर्थ और सम्बन्धों का यथार्थबोध ।

изучение смысла слов, их настоящее значение, этимология.

पुनः क्रमेण किं किमध्येतव्यम् ?

punaḥ krameṇa kiṁ kimadhyetavyam

फिर क्रम से क्याक्या पढ़ना चाहिये ?

что следует изучить далее, следуя порядку изучения?

शिक्षाकल्पनिघण्टुनिरुक्तछन्दोज्योतिषाणि वेदानामङ्गानि मीमांसावैशेषिक न्याययोगसांख्य वेदान्तानि उपाङ्गानि आयुर्धनुर्गान्धर्वार्थान् उपवेदान् ऐतरेय शतपथसामगोपथ ब्राह्मणान्यधीत्य ऋग्यजुस्सामा‍ऽथर्ववेदान् पठत ।

śikṣākalpanighaṇṭuniruktachandojyotiṣāṇi vedānāmaṅgāni mīmāṁsāvaiśeṣika nyāyayogasāṁkhya vedāntāni upāṅgāni āyurdhanurgāndharvārthān upavedān aitareya śatapathasāmagopatha brāhmaṇānyadhītya ṛgyajussāmā paṭhata

शिक्षा, कल्प, निघण्टु, निरुक्त, छन्द और ज्योतिष वेदों के अंग । मीमांसा, वैशेषिक, न्याय, योग, सांख्य और वेदान्त उपाङ्ग । आयुर्वेद, धनुर्वेद, गान्धर्ववेद और अर्थवेद उपवेद । ऐतरेय, शतपथ, साम और गोपथ ब्राह्मण ग्रन्थों को पढ़के ऋग्वेद, यनुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को पढ़ो ।

Кальпа, Нишханту (словарь минонимов), Нирукта (этимология), Чхандах (наука о стихосложении, стихотворных размерах, двоичном кодировании), астрономию, Веды вместе с ведагнгами, миманса и вайшешика, логика, йога и санкхя, веданта вместе с сопутствующими текстами,, медицина, военное искусство, искусство, экономика, айтарея, шатапатха, гопатха, сама брахманы и другие тексты; риг, яджур, сама, атхарва веды- вот то, что следует изучить.

एतत्सर्वं विदित्वा किं कार्य्यम् ?

etatsarvaṁ viditvā kiṁ kāryyam

इन सबको जान के फिर क्या करना चाहिये ?

что следует нам делать после этого?

धर्मजिज्ञासा‍ऽनुष्ठाने एतेषामेवा‍ऽध्यापनं च ।

dharmajijñāsā eteṣāmevā ca

धर्म के जानने की इच्छा तथा उसका अनुष्ठान और इन्हीं को सर्वदा पढ़ाना ।

далее следует изучить законы природы, обряды и ритуалы…

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3 Имя и место жительства

नामनिवासस्थानप्रकरणम् nāmanivāsasthānaprakaraṇam

तव किन्नामास्ति ?

tava kinnāmāsti? =

tava kiṁ nāma asti ?

तेरा क्या नाम है ?

Как тебя зовут?

देवदत्तः devadattaḥ देवदत्त ।

Дэвадатта — «Данный небом», или «Данный Богом»- «Богдан»

को‍ऽभिजनो युवयोर्वर्त्तते ?

ko.bhijano yuvayorvarttate =

kaḥ abhijanaḥ yuvayoḥ varttate

तुम दोनों का अभिजनदेश कौन है ?

К какому роду вы оба принадлежите? (из какой вы оба семи, расы, страны, или родовой общины)

कुरुक्षेत्रम् ।

kurukṣetram

कुरुक्षेत्र ।

Курукшетра.

युष्माकं जन्मदेशः को विद्यते ?

yuṣmākaṁ janmadeśaḥ ko vidyate ?

तुम्हारा जन्मदेश कौन है ?

Где ты родился? (что за место твоего рождения? Что о нем известно?)

पञ्चालाः ।

pañcālāḥ

पञ्जाब ।

Паньчаля

भवन्तः कुत्रत्याः ?

bhavantaḥ kutratyāḥ

आप कहाँ के हो ?

Откуда вы?

वयं दक्षिणात्याः स्मः

vayaṁ dakṣiṇātyāḥ smaḥ

हम दक्षिणी हैं ।

Мы с юга.

तत्र का पुरः ?

tatra kā puraḥ ?

वहां आपके निवास की कौन नगरी है ?

Какой там город? (из какого вы города)?)

मुम्बापुरी ।

mumbāpurī

मुम्बई ।

Мумбаи

इमे क्व निवसन्ति ?

ime kva nivasanti ?

ये लोग कहां रहते हैं ?

Где они живут?

नेपाले

nepāle

नेपाल में ।

В Непале.

अयं किमधीते ?

ayaṁ kimadhīte ?

यह क्या पढ़ता है ?

Что там наверху /написано/?

व्याकरणम् ।

vyākaraṇam

व्याकरण को ।

Грамматика, надпись.

त्वया किमधीतम् ?

tvayā kimadhītam

तूने क्या पढ़ा है ?

что ты там на верху /прочитал/?

न्यायशास्त्रम् ।

nyāyaśāstram

न्यायशास्त्र

Логику. Логику

भवता किं पठितमस्ति ?

bhavatā kiṁ paṭhitamasti ?

आपने क्या पढ़ा है ?

Что же вы прочли там?

पूर्वमीमांसाशास्त्रम् ।

pūrvamīmāṁsāśāstram

पूर्वमीमांसाशास्त्र ।

Пурва миманса шастра

अयं भवदीयश्छात्रः किं प्रचर्चयति ?

ayaṁ bhavadīyaśchātraḥ kiṁ pracarcayati

यह आपका विद्यार्थी क्या पढ़ता है ?

Что изучает (повторяет) этот ученик?

ऋग्वेदम्

ṛgvedam

ऋग्वेद को ।

Риг веду.

त्वं कुत्र गच्छसि ?

tvaṁ kutra gacchasi

तू कहां जाता है ?

Куда ты идешь?

पाठाय व्रजामि

pāṭhāya vrajāmi

पढ़ने के लिये जाता हूं ।

Я иду учиться.

कस्मादधीषे ?

kasmādadhīṣe ?

किससे पढ़ता है ?

откуда эти задания (кто наставник)?

यज्ञदत्तादध्यापकात् ।

yajñadattādadhyāpakāt

यज्ञदत्त अध्यापक से ।

От учителя Яджнадатты (имя можно перевести как данный обрядом…)

इमे कुतो‍ऽभ्यस्यन्ति ?

ime kuto.bhyasyanti

ये किससे पढ़ते हैं ?

В чем они упражняются?

विष्णुमित्रात् ।

viṣṇumitrāt

विष्णुमित्र से ।

Вишну-митра- общее название для ряда священных писаний, имя священника или философа. («друг для Вишну»)

तवाध्ययने कियन्तः संवत्सरा व्यतीताः ?

tavādhyayane kiyantaḥ saṁvatsarā vyatītāḥ ?

तुझ को पढ़ते हुए कितने वर्ष बीते ?

Сколько лет ты уже учишься?

पञ्च ।

pañca

पांच ।

Пять.

भवान् कति वार्षिकः ?

bhavān kati vārṣikaḥ

आप कितने वर्ष के हुए ?

Сколько Вам лет?

त्रयोदशवार्षिकः ।

trayodaśavārṣikaḥ

तेरह वर्ष का ।

Тринадцать лет

त्वया पठनारम्भः कदा कृतः ?

tvayā paṭhanārambhaḥ kadā kṛtaḥ

तूने पढ़ने का आरम्भ कब किया था ?

Когда ты начал учиться?

यदाहमष्टवार्षिकोऽभूवम् ।

yadāhamaṣṭavārṣiko.bhūvam

जब मैं आठ वर्ष का हुआ था ।

Когда мне было 8 лет.

तव मातापितरौ जीवतो न वा ?

tava mātāpitarau jīvato na vā ?

तेरे मातापिता जीते हैं वा नहीं ?

Живы ли твои родители?

विद्येते ।

vidyete

जीते हैं ।

Живы, обретаются в добром здравии.

तव कति भ्रातरो भगिन्यश्च ?

tava kati bhrātaro bhaginyaśca

तेरे कितने भाई और बहिन हैं ?

Сколько у тебя братьев и сестер?

त्रयो भ्रातरश्चैका भगिन्यास्ति ।

trayo bhrātaraścaikā bhaginyāsti

तीन भाई और एक बहिन है ।

Три брата и одна сестра

तेषु त्वं ज्यष्ठस्ते, सा वा ?

teṣu tvaṁ jyaṣṭhaste sā vā ?

उनमें तू ज्येष्ठ वा तेरे भाई अथवा बहिन ?

Среди всех ты самый старший или она или братья?

अहमेवाग्रजो‌ऽस्मि ।

ahamevāgrajo

मैं ही सबसे पहिले जन्मा हूं ।

Я самый старший.

तव पितरौ विद्वांसौ न वा ?

tava pitarau vidvāṁsau na vā ?

तेरे मातापिता पढ़े हैं वा नहीं ?

У твоих родителей есть образование или нет?

महाविद्वांसौ स्तः ।

mahāvidvāṁsau staḥ

बड़े विद्वान् हैं ।

Очень образованы.

तर्हि त्वया पित्रोः सकाशात्कुतो न विद्या गृहीता ?

tarhi tvayā pitroḥ sakāśātkuto na vidyā gṛhītā ?

तो तूने मातापिता से विद्या ग्रहण क्यों न की ?

Почему же тогда ты не учился дома у родителей?

अष्टमवर्षपर्य्यन्तं कृता ।

aṣṭamavarṣaparyyantaṁ kṛtā

आठ वर्ष पर्यन्त की थी ।

теперь мне уже восемь лет…

अत ऊर्ध्वं कुतो न कृता ?

ata ūrdhvaṁ kuto na kṛtā ?

इससे आगे क्यों न की ?

Разве не следует пойти дальше (выше этого уровня)?

मातृमान् पितृमानाचार्य्यवान् पुरुषो वेदेति शास्त्रविधेः ।

mātṛmān pitṛmānācāryyavān puruṣo vedeti śāstravidheḥ

मातापिता से आठवें वर्ष पर्यन्त, इसके आगे आचार्य से पढ़ने का शास्त्र में विधान है इस से ।

Согласно правилам, изложенным в шастрах, человек должен прийти к учителю от своих родителей.

अन्यच्च गृहकार्यबाहुल्येन निरन्तरमध्ययनमेव न जायते‍ऽतः ।

anyacca gṛhakāryabāhulyena nirantaramadhyayanameva na jāyate

और भी घर में बहुत काम करने से निरन्तर पढ़ना नहीं हो सकता इसलिए भी ।

бесконечные домашние дела и другие неотложные вещи НЕ РОЖДАЮТ качественного и непрерывного обучения…

अतः परं कियद्वर्षपर्यन्तमध्येष्यसे ?

ataḥ paraṁ kiyadvarṣaparyantamadhyeṣyase ?

इसके आगे कितने वर्षपर्यन्त पढ़ेगा ?

И так, сколько лет продлится это всестороннее обучение?

पञ्चत्रिंशद्वर्षाणि ।

pañcatriṁśadvarṣāṇi

पैंतीस वर्ष तक ।

ТРИДЦАТЬ ПЯТЬ ЛЕТ

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गृहाश्रमप्रकरणम्

gṛhāśramaprakaraṇam

Наставления в о правильном поведении

पुनस्ते का चिकीर्षास्ति ?

punaste kā cikīrṣāsti

फिर तुझको क्या करने की इच्छा है ?

что следует теперь делать?

गृहाश्रमस्य ।

gṛhāśramasya

गृहाश्रम की ।

(нужно изучить) жизненный уклад.

किं च भोः पूर्णविद्यस्य जितेन्द्रियस्य परोपकारकरणाय संन्यासाश्रमग्रहणं शास्त्रोक्तमस्ति तन्न करिष्यसि ?

kiṁ ca bhoḥ pūrṇavidyasya jitendriyasya paropakārakaraṇāya saṁnyāsāśramagrahaṇaṁ śāstroktamasti tanna kariṣyasi

क्यों जी ! जिसको पूर्ण विद्या और जो जितेन्द्रिय है उसको परोपकार करने के लिये संन्यासाश्रम का ग्रहण करना शास्त्रोक्त है, इसको न करोगे ?

Шастры говорят: тот не живет, кто не стремится к полноте знания, кто не помогает нуждающимся…

किं गृहाश्रमे परोपकारो न भवति ?

kiṁ gṛhāśrame paropakāro na bhavati ?

क्या गृहाश्रम से परोपकार नहीं हो सकता ?

Разве не самая важная задача в жизни- служение другим?

यादृशः संन्यासाश्रमिणा कर्तुं शक्यते न तादृशो गृहाश्रमिणा‍ऽनेककार्यैं प्रतिबन्धकत्वेनाऽस्य सर्वत्र भ्रमणाशक्यत्वात् ।

yādṛśaḥ saṁnyāsāśramiṇā kartuṁ śakyate na tādṛśo gṛhāśramiṇā pratibandhakatvenā.sya sarvatra bhramaṇāśakyatvāt

जैसा संन्यासाश्रमी से मनुष्य का उपकार हो सकता है वैसा गृहाश्रमी से नहीं हो सकता, क्योंकि अनेक कामों की रुकावट से इसका सर्वत्र भ्रमण ही नहीं हो सकता ।

невозможно стать санъясином, отринувшим мир и бродящим по свету, пока не завершены все земные дела. Невозможно начать путь санъяси, пока не пройдены все основные жизненные этапы (учеба, дом и семья, изучение великой мудрости «лесных» книг (аранъяки))…

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भोजनप्रकरणम् bhojanaprakaraṇam

Предложения за трапезой

नित्यः स्वाध्यायो जातो भोजनसमय आगतो गन्तव्यम् ।

nityaḥ svādhyāyo jāto bhojanasamaya āgato gantavyam

नित्य का पढ़ना हो गया, भोजन समय आया, चलना चाहिये ।

учиться можно вечно, но пришло время обеда!

तव पाकशालायां प्रत्यहं भोजनाय किं किं पच्यते ?

tava pākaśālāyāṁ pratyahaṁ bhojanāya kiṁ kiṁ pacyate

तुम्हारी पाकशाला में प्रतिदिन भोजन के लिये क्याक्या पकाया जाता है ?

Что готовят у вас на кухне сегодня на завтрак?

Что готовят у вас на кухне каждый день?

(प्रत्यहं можно перевести и как «каждый день», «ежедневно» или как «утром»)

शाकसूपौदश्वित्कौदनरोटिकादयः ।

śākasūpaudaśvitkaudanaroṭikādayaḥ

शाक, दाल, कढ़ी, भात, रोटी आदि ।

овощи, чечевица, рис, хлеб и другое.

किं वः पायसादिमधुरेषु रुचिर्नास्ति ?

kiṁ vaḥ pāyasādimadhureṣu rucirnāsti

क्या आप लोगों की खीर आदि मीठे भोजन में रुचि नहीं है ?

(тебе) нравятся сладкие, вкусные блюда, не так ли?

अस्ति खलु परन्त्वेतानि कदाचित् कदाचित् भवन्ति ।

asti khalu parantvetāni kadācit kadācit bhavanti

है सही परन्तु ये भोजन कभीकभी होते हैं ।

да, точно! Такие блюда иногда бывают.

Правда, когда-то такие блюда бывают (у нас)

कदाचिच्छष्कुलीश्रीखण्डादयोऽपि भवन्ति न वा ?

kadācicchaṣkulī śrīkhaṇḍādayo.pi bhavanti na vā

कभी पूरी कचौड़ी शिखरन आदि भी होते हैं वा नहीं ?

А бывают ли сладкие пироги из рисовой дробленки, зажаренные в масле, с патакой и другие сладости?

भवन्ति परन्तु यथर्त्तुयोगम् ।

испр.

भवन्ति परन्तु यथर्तुयोगम् ।

bhavanti parantu yathartuyogam

होते हैं परन्तु जैसा ऋतु का योग होता है वैसा ही भोजन बनाते हैं ।

да, бывают, но это зависит от сезона.

सत्यमस्माकमपि भोजनादिकमेवमेव निष्पद्यते ।

satyamasmākamapi bhojanādikamevameva niṣpadyate

ठीक है हमारे भी भोजन आदि ऐसे ही बनते हैं ।

наша еда самая правильная и правильно приготовленная.

त्वं भोजनं करिष्यसि न वा ?

tvaṁ bhojanaṁ kariṣyasi na vā

तू भोजन करेगा वा नहीं ?

Ты будешь есть или нет?

अद्य न करोम्यजीर्णतास्ति ।

adya na karomyajīrṇatāsti

आज नहीं करता अजीर्णता है ।

сегодня все свежее!

(сегодня нет ничего старого)

अधिकभोजनस्येदमेव फलम् ।

adhikabhojanasyedameva phalam

अधिक भोजन का यही फल है ।

Вот этот плод в добавок к основной пище.

Этот плод на десерт .

बुद्धिमत्ता तु यावज्जीर्यते तावदेव भुज्यते ।

buddhimattā tu yāvajjīryate tāvadeva bhujyate

बुद्धिमान पुरुष तो जितना पचता है उतना ही खाता है ।

Мудрец тот, кто способен есть ровно столько, сколько ему действительно нужно.

Умеренность в пище- вот мудрость.

अतिस्वल्पे भुक्ते शरीरबलम् ह्रस्त्यधिके चातः सर्वदा मिताहारी भवेत् ।

atisvalpe bhukte śarīrabalam hrastyadhike cātaḥ sarvadā mitāhārī bhavet

बहुत कम और अत्यधिक भोजन करने से शरीर का बल घटता है, इससे सब दिन मिताहारी होवे ।

да будет пища умеренной: слишком малое или слишком большое ее количество ослабляет тело! Лишь птица чаля, о которой говорят, что она питается каплями дождя, способна довольствоваться слишком малым.

योऽन्यथाऽऽहारव्यवहारौ करोति स कथं न दुःखी जायेत ?

yo.nyathā..hāravyavahārau karoti sa kathaṁ na duḥkhī jāyet

जो उलटपलट आहार और व्यवहार करता है वह क्यों न दुःखी होवे ?

пусть да не печалится тот, кто следует другому образу жизни (если сам его выбрал). Почему бы не грустить тому, кто придерживается другой диеты, другого поведения?

येन शरीराच्छ्रमो न क्रियते स शरीरसुखं नाप्नोति ।

yena śarīrācchramo na kriyate sa śarīrasukhaṁ nāpnoti

जो शरीर से परिश्रम नहीं करता वह शरीर के सुख को प्राप्त नहीं होता ।

Тот, кто не заботится о своем теле не получает от него удовольствия.

येनात्मना पुरुषार्थो न विधीयते तस्यात्मनो बलमपि न जायते ।

yenātmanā puruṣārtho na vidhīyate tasyātmano balamapi na jāyate

जो आत्मा से पुरुषार्थ नहीं करता उसको आत्मा का बल भी नहीं बढ़ता ।

Не рождается душевная крепость у того, кто не прикладывает для этого усилий.

तस्मात्सर्वैर्मनुष्यैर्यथाशक्ति सत्क्रिया नित्यं साधनीयाः ।

tasmātsarvairmanuṣyairyathāśakti satkriyā nityaṁ sādhanīyāḥ

इससे सब मनुष्यों को उचित है यथाशक्ति उत्तम कर्मों की साधना नित्य करनी चाहिये ।

По этой причине все люди должны применять в жизни только самые свои лучшие качества, умения и навыки.

भो देवदत्त ! त्वामहं निमन्त्रये ।

bho devadatt tvāmahaṁ nimantraye

हे देवदत्त ! मैं तुमको भोजन के लिए निमन्त्रित करता हूं ।

Эй, Девадатта (Богдан), приглашаю тебя [пообедать]

मन्येऽहं कदा खल्वागच्छेयम् ?

manye.haṁ kadā khalvāgaccheyam

मैं मानता हूँ परन्तु किस समय आऊँ ?

Понятно, а когда приходить?

श्वो द्वितीयप्रहरमध्ये आगन्तासि ।

śvo dvitīyapraharamadhye āgantāsi

śvo dvitīyapraharamadhye āgantāsi

कल डेढ पहर दिन चढ़े आना ।

Завтра утром, в средине второй пратхары- 4:30 утра.

आगच्छ भो, आसनमध्यास्व, भवता ममोपरि महती कृपा कृता ।

āgaccha bho āsanamadhyāsva bhavatā mamopari mahatī kṛpā kṛtā

आप आइये, आसन पर बैठिये, आपने मुझ पर बड़ी कृपा की ।

О! проходи, садись пожалуйста! Ты так добр ко мне (потому что пришел)!

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देशदेशान्तरप्रकरणम् deśadeśāntaraprakaraṇam

Предложения на тему «заграница»

भवानेतान् जानातीमे महाविद्वांसः सन्ति ।

bhavānetān jānātīme mahāvidvāṁsaḥ santi

आप इनको जानते हैं ये बड़े विद्वान् हैं ।

Вы знаете их- они великие ученые.

किन्नामान एते कुत्रत्याः खलु ?

kinnāmāna ete kutratyāḥ khalu

इनके क्याक्या नाम हैं और ये कहांकहां के रहने वाले हैं ?

Откуда они и как их зовут?

अयं यज्ञदत्तः काशीनिवासी ।

ayaṁ yajñadattaḥ kāśīnivāsī

यह यज्ञदत्त काशी में निवास करता है ।

Это Яджнадатта («Данный обрядом») он живет в Каши (Варанаси)

विष्णुमित्रोऽयं कुरुक्षेत्रवास्तव्यः ।

viṣṇumitro.yaṁ kurukṣetravāstavyaḥ

यह विष्णुमित्र कुरुक्षेत्र में वसता है ।

Это Вишнумитра («Друг Вишну»), он живет на Курукшетре (Современные индийцы полагают, что «поле Куру» на котором происходили легендарные события в конце Махабхараты, расположено в окрестностях современного Дели )

सोमदत्तोऽयं माथुरः ।

somadatto.yaṁ māthuraḥ

यह सोमदत्त मथुरा में रहता है ।

Сомадатта («Данный Сомой»- Богом Луны или лунным светом)- из Матхуры

अयं सुशर्मा पर्वतीयः ।

ayaṁ suśarmā parvatīyaḥ

यह सुशर्मा पर्वत में रहता है ।

Этот Сушарма («Находящийся под великим покровительством»)- живет в горах (или в месте под именем Парвати)

अयमाश्वलायनो दाक्षिणात्योऽस्ति ।

ayamāśvalāyano dākṣiṇātyo.sti

यह आश्वलायन दक्षिणी है ।

Сей Ашвалайана Быстрота прецессии» — название одной из ведийских школ; имя одно из «авторов» Ригведы) — с Юга.

अयं जयदेवः पाश्चात्यो वर्तते ।

ayaṁ jayadevaḥ pāścātyo vartate

यह जयदेव पश्चिम देशवासी है ।

Этот Джайадева («Бог победы»)- живет на Западе

(Запад- последняя по счету сторона горизонта, поэтому в ее отношении применяется слово «pāścātyа»- «стоящий после всех» — «последний»)

अयं कुमारभट्टो बाङ्गो विद्यते ।

ayaṁ kumārabhaṭṭo bāṅgo vidyate

यह कुमारभट्ट बंगाली है ।

Это Кумарабхатта («Лучший из лучших») из Бенгалии

अयं कापिलेयः पाताले निवसति ।

ayaṁ kāpileyaḥ pātāle nivasati

यह कापिलेय पाताल अर्थात् अमेरिका में रहता है ।

он из США. (дословно- он из тех мест, которые расположены там, где бывает Солнце, когда оно освещает страны на другой стороне Земли. Вообще- не очень корректно: более правильно было бы сказать, что он из Ада, хотя и посвящен в учение санкхйа (учение мудреца Капилы)…)

अयं चित्रभानुर्हरिवर्षस्थः ।

ayaṁ citrabhānurharivarṣasthaḥ

यह चित्रभानु हिमालय से उत्तर हरिवर्ष अर्थात् यूरोप में रहता है ।

Сей Читрабхану («Яркое Светило») из Европы… (Автор обозначает Европу словом «Хариварша», что означает: одна из «стран» Джамбу-двипа- мифическая небесная страна, расположенная к северу от Гималаев. Астрономически- к северу от северного тропика; одна из северных стран, покоренных Арджуной (Махабхарата))

इमौ सुकामसुभद्रौ चीननिकायौ ।

imau sukāmasubhadrau cīnanikāyau

ये सुकाम और सुभद्र चीन के वासी हैं ।

те двое: Сукама («Хороший семьянин») и Субхадра («Добродетельный») китайцы.

(Китай определяется как «народ Чина, имеющий прикрытые, узкие глаза» (cīna nikāya))

अयं सुमित्रो गन्धारस्थायी ।

ayaṁ sumitro gandhārasthāyī

यह सुमित्र गन्धार अर्थात् काबुल कन्धार का रहने वाला है ।

Этот Сумитра («Очень Дружелюбный») из Гандхара (ныне афганский Кандхар)

अयं सुभटो लङ्काजः ।

ayaṁ subhaṭo laṅkājaḥ

यह सुभट लंका में जन्मा है ।

Этот Субхата («Победитель»)- уроженец Ланки

इमे पंच सुवीरातिबलसुकर्मसुधर्मशतधन्वानो मत्स्याः ।

ime paṁca suvīrātibalasukarmasudharmaśatadhanvāno matsyāḥ

सुवीर, अतिबल, सुकर्मा, सुधर्मा और शतधन्वा ये पांच मारवाड़ के रहने वाले हैं ।

Эти пятеро: Сувира («Могучий»), Атибаля («Силач»), Сукарма («Добродетельный»), Судхарма («Блюститель закона») и Шатдханва (“Обладающий свойствами сотни радуг”) — жители страны Матсйа. («Рыба» — название страны и народа, а так же знака Зодиака. Автор отождествляет эту срану с современным Марваром, расположенным в штате Раджастхан)

एते मया आमन्त्रिताः स्वस्वस्थानादागताः ।

ete mayā āmantritāḥ svasvasthānādāgatāḥ

ये सब मेरे बुलाने पर अपनेअपने घर से आये हैं ।

Все они прибыли из своих домов и собрались у меня

इमे शिवकृष्णगोपालमाधवसुचन्द्रप्रक्रमभूदेव चित्रसेनमहारथा नवात्रत्याः ।

ime śivakṛṣṇagopālamādhavasucandraprakramabhūdeva citrasenamahārathā navātratyāḥ

शिव, कृष्ण, गोपाल, माधव, सुचन्द्र, प्रक्रम, भूदेव, चित्रसेन और महारथ ये नव इस (मध्य) प्रदेश के रहने वाले हैं ।

Шива («Милостивый»), Кришна («Темный»), Гопала («Владетель Коров»), Мадхава («Медвяный»), Сучандра («Полнолунный»), Пракрама («Пройдущий везде»), Бхудева («Господь бытия»), Читрасена («Светаполк»), Махаратха («Великий воин»)- вот девять здешних жителей.

अहोभाग्यं मेऽस्ति त्वत्कृपयैतेषामपि समागमो जातः ।

ahobhāgyaṁ me.sti tvatkṛpayaiteṣāmapi samāgamo jātaḥ

मेरा बड़ा भाग्य है कि आपकी कृपा से इन सत्पुरुषों का भी मिलाप हुआ ।

Мне несказанно повезло, что все эти люди пришли сюда по твоей милости!

अहमपि सभवतः सर्वानेतान्निमन्त्रयितुमिच्छामि ।

ahamapi sabhavataḥ sarvānetānnimantrayitumicchāmi

मैं भी आपके समेत इन सबका निमन्त्रण करना चाहता हूं ।

Я желаю пригласить их всех собраться вместе

अस्माभिर्भवन्निमन्त्रणमूरीकृतम् ।

asmābhirbhavannimantraṇamūrīkṛtam

हमने आपका निमन्त्रण स्वीकार किया ।

Мы приняли Ваше приглашение

प्रीतोऽस्मि परन्तु भवद्‍भोजनार्थं किं किं पक्तव्यम् ?

prīto.smi parantu bhavad kiṁ kiṁ paktavyam

आपके निमन्त्रण मानने से मैं बड़ा प्रसन्न हुआ परन्तु आपके भोजन के लिये क्याक्या पकाया जाय ?

Мне очень приятно, а что будет приготовлено на обед?

यद्यद्‍भोक्तुमिच्छास्ति तत्तदाज्ञापयन्तु ।

yadyad tattadājñāpayantu

जिसजिस पदार्थ के भोजन की इच्छा हो उसउस की आज्ञा कीजिये ।

Все, что они пожелают должно быть сделано

भवान् देशकालज्ञः कथनेन किं यथायोग्यमेव पक्तव्यम्‌ ।

bhavān deśakālajñaḥ kathanena kiṁ yathāyogyameva paktavyam

आप देशकाल को जानते हैं कहने से क्या यथायोग्य ही पकाना चाहिये ।

Вы знаете место и время, так что всё должно быть приготовлено соответствующим

सत्यमेवमेव करिष्यामि ।

satyamevameva kariṣyāmi

ठीक है, ऐसा ही करूंगा ।

Это правильно! Я все сделаю!

उत्तिष्ठत भोजनसमय आगतः पाकः सिद्धो वर्त्तते ।

uttiṣṭhata bhojanasamaya āgataḥ pākaḥ siddho varttate

उठिये भोजन समय आया पाक तैयार है ।

Просыпайся! Время обеда! Идем готовить еду!

भो भृत्य ! पाद्यमर्घ्यमाचमनीयं जलं देहि ।

bho bhṛty pādyamarghyamācamanīyaṁ jalaṁ dehi

हे नौकर ! इनको पग हाथ मुख धोने के लिए जल दे ।

О, слуга, подайте им воды для омовения тела.

इदमानीतं गृह्यताम् ।

idamānītaṁ gṛhyatām

यह लाया, लीजिये ।

Возьми, подай, принеси.

भो पाचकाः ! सर्वान् पदार्थान् क्रमेण परिवेविष्ट ।

bho pācakāḥ sarvān padārthān krameṇa pariveviṣṭa

हे पाचक लोगो ! सब पदार्थों को क्रम से परोसो ।

Привет, поворята! Подавайте ка все ингредиенты сюда по порядку!

भुञ्जीधवम् ।

bhuñjīdhavam

भोजन कीजिये ।

Ешьте.

भोजनस्य सर्वे पदार्थाः श्रेष्ठा जाता न वा ?

bhojanasya sarve padārthāḥ śreṣṭhā jātā na vā

भोजन के सब पदार्थ अच्छे हुए हैं वा नहीं ?

Все ли вкусно и качественно?

अत्युत्तमाः सम्पन्नाः किं कथनीयम् ।

atyuttamāḥ sampannāḥ kiṁ kathanīyam

क्या कहना है, बड़े उत्तम हुए हैं ।

что же они должны сказать? Только «отлично»!

भवता किञ्चित् पायसं ग्राह्यं यस्येच्छाऽस्ति वा ।

bhavatā kiñcit pāyasaṁ grāhyaṁ yasyecchā.sti vā

आप थोड़ी सी खीर लीजिये वा जिसकी इच्छा हो ।

Что желаешь попить? Возьми все, что хочешь.

प्रभूतं भुक्तं तृप्ताः स्मः ।

prabhūtaṁ bhuktaṁ tṛptāḥ smaḥ

बहुत रुचि से भोजन किया तृप्त हो गये हैं ।

Обед был очень вкусный и насыщенный и интересный.

तर्हुत्तिष्ठत ।

tarhuttiṣṭhata

तो उठिये ।

ну вот, вставай.

जलं देहि ।

jalaṁ dehi

जल दे ।

Умойтесь

गृह्यताम् ।

gṛhyatām

लीजिये ।

Возьми

ताम्बूलादीन्यानीयन्ताम् ।

tāmbūlādīnyānīyantām

पान बीड़े इलायची आदि लाओ ।

Принесите бетель

इमानि सन्ति गृह्‍णन्तु ।

imāni santi gṛh

ये हैं, लीजिये ।

Это всё, бери.

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7 В собрании सभाप्रकरणम् sabhāprakaraṇam

इदानीं सभायां काचिच्चर्च्चा विधेया ।

idānīṁ sabhāyāṁ kāciccarccā vidheyā

अब सभा में कुछ वार्तालाप करना चाहिये ।

На этом собрании будет обсуждаться нечто очень важное.

धर्म्मः किं लक्षणोऽस्तीति पृच्छामि ?

dharmmaḥ kiṁ lakṣaṇo.stīti pṛcchāmi

मैं पूछता हूं कि धर्म्म का क्या लक्षण है ?

Я спрашиваю: Каковы признаки дхармы?

वेदप्रतिपाद्यो न्याय्यः पक्षपातरहितो यश्च परोपकारसत्याऽऽचरणलक्षणः ।

vedapratipādyo nyāyyaḥ pakṣapātarahito yaśca paropakāra satyā..caraṇalakṣaṇaḥ

वेदोक्त न्यायानुकूल पक्षपातरहित और जो पराया उपकार तथा सत्याचरणयुक्त है उसी को धर्म जानना चाहिये ।

тот обладает признаками истинного поведения, кто следует путем логики, ведам, добродетелен, благонравен.

ईश्वरः कोऽस्तीति ब्रूहि ?

īśvaraḥ ko.stīti brūhi

ईश्वर किसको कहते हैं, आप कहिये ?

Что есть Господь?

यः सच्चिदानन्दस्वरूपः सत्यगुणकर्मस्वभावः ।

yaḥ saccidānandasvarūpaḥ satyaguṇakarmasvabhāvaḥ

जो सच्चिदानन्दस्वरूप और जिसके गुण कर्म स्वभाव सत्य ही हैं वह ईश्वर है ।

истина, истинная суть природы, ее качеств- [и есть Бог]

मनुष्यैः परस्परं कथं वर्त्तितव्यम् ?

manuṣyaiḥ parasparaṁ kathaṁ varttitavyam

मनुष्यों को एकदूसरे के साथ कैसेकैसे वर्तना चाहिये ?

Как достичь равенства между людьми?

धर्मसुशीलतापरोपकारैः सह यथायोग्यम् ।

dharmasuśīlatāparopakāraiḥ saha yathāyogyam

धर्म, श्रेष्ठ स्वभाव और परोपकार के साथ जिनसे जैसा व्यवहार करना योग्य हो वैसा ही उनसे वर्तना चाहिये ।

зная дхарму, будучи добры, объединившись, они станут равными.

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8 О величайших правителях Подлунного мира आर्य्यावर्त्तचक्रवर्त्तिराजप्रकरणम्

āryyāvarttacakravarttirājaprakaraṇam

अस्मिन्नार्यावर्त्ते पुरा के के चक्रवर्त्तिराजा अभूवन् ?

asminnāryāvartte purā ke ke cakravarttirājā abhūvan

इस आर्यावर्त्त देश में पहिले कौनकौन चक्रवर्ती राजा हुए हैं ?

Кто были первые великие правители Арьяварты — Подлунного мира?

स्वायम्भुवाद्या युधिष्ठिरपर्यन्ताः ।

svāyambhuvādyā yudhiṣṭhiraparyantāḥ

स्वायंभु से लेकर युधिष्ठिर पर्य्यन्त ।

От Сваямбхува («Самосущий» — Брахма) до Юдхиштхиры («Стойкий в битве»- Герой Махабхараты. 12 Великих правителей Арьяварты- вероятно, суть 12 Полнолуний в году)

चक्रवर्त्तिशब्दस्य कः पदार्थः ?

cakravarttiśabdasya kaḥ padārthaḥ

चक्रवर्त्ती पद का अर्थ क्या है ?

Кто такой Чакраварти («Вращающий Колесо»)

य एकस्मिन्‌ भूगोले स्वकीयामाज्ञां प्रवर्त्तयितुं समर्थाः

ya ekasmin bhūgole svakīyāmājñāṁ pravarttayituṁ samarthāḥ

जो एक भूगोल भर में अपनी राजनीति रूप आज्ञा को चलाने में समर्थ हों ।

Это тот, кто может вести независимую политику, как государственную, так и финансовую.

ते कीदृशीमाज्ञां प्राचीचरन् ?

te kīdṛśīmājñāṁ prācīcaran

वे कैसी आज्ञा का प्रचार करते थे ?

Каким принцапан они следовали?

यया धार्मिकाणां पालनं दुष्टानां च ताडनं भवेत् ।

yayā dhārmikāṇāṁ pālanaṁ duṣṭānāṁ ca tāḍanaṁ bhavet

जिससे धार्मियों का पालन और दुष्टों का ताड़न होवे ।

Поддержка праведных и устранение злодеев

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9 Отношения правителя и подданных राजप्रजालक्षणराजनीत्यनीतिप्रकरणम्

rājaprajālakṣaṇarājanītyanītiprakaraṇam

राजा को भवितुं शक्नोति ?

rājā ko bhavituṁ śaknoti

राजा कौन हो सकता है ?

Кто может стать правителем?

यो धार्मिकाणां सभाया अधिपतित्वे योग्यो भवेत् ।

yo dhārmikāṇāṁ sabhāyā adhipatitve yogyo bhavet

जो धर्मात्माओं की सभा का सभापति होने योग्य होवे ।

тот, кто достоин быть председателем на собрании праведников.

यः प्रजां पीडयित्वा स्वार्थं साधयेत् स राजा भवितुमर्हो‍ऽस्ति न वा ?

yaḥ prajāṁ pīḍayitvā svārthaṁ sādhayet sa rājā bhavitumarho na vā

जो प्रजा को दुःख देकर अपना प्रयोजन साधे वह राजा हो सकता है वा नहीं ?

Может ли быть правителем тот, кто притесняет подданных ради своего собственного блага?

न हि न हि न हि स तु दस्युः खलु । नहीं नहीं नहीं वह तो डाकू ही है ।

нет, нет и нет! Это демон и вор!

या राजद्रोहिणी सा तु न प्रजा किन्तु स्तेनतुल्या मन्तव्या ।

yā rājadrohiṇī sā tu na prajā kintu stenatulyā mantavyā

जो राजव्यवहार में विरोध करे वह प्रजा तो नहीं किन्तु उसको चोर के समान जानना चाहिये ।

тот же, кто выступает против власти- не может быть подданным и с ним следует поступать как с вором.

कथंभूता जनाः प्रजा भवितुमर्हाः ?

kathaṁbhūtā janāḥ prajā bhavitumarhāḥ

कैसे मनुष्य प्रजा होने को योग्य हैं ?

Как люди могут быть достойными подданными?

ये धार्मिकाः सततं राजप्रियकारिणश्च

ye dhārmikāḥ satataṁ rājapriyakāriṇaśca

जो धर्मात्मा और निरन्तर राजा के प्रियकारी हों ।

Те будут достойчными, кто праведен и предан правителю.

राजपुरुषैरप्येवमेव प्रजाप्रियकारिभिः सदा भवितव्यम् । राजसम्बन्धी पुरुषों को भी वैसे ही प्रजा के प्रिय करने में सदा रहना चाहिये ।

также и люди, преданные правителю должны любить подданных.

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10 Отношение к врагам शत्रुवशकरणप्रकरणम्

śatruvaśakaraṇaprakaraṇam

एते शत्रुभिः सह कथं वर्त्तेरन् ?

ete śatrubhiḥ saha kathaṁ vartteran

ये लोग शत्रुओं के साथ कैसे वर्त्तें ?

Как им следует поступать со своими врагами?

राजप्रजोत्तमपुरुषैररयः सामदामदण्डभेदैर्वशमानेयाः ।

rājaprajottamapuruṣairarayaḥ sāmadāmadaṇḍabhedairvaśamāneyāḥ

राजा और प्रजा के श्रेष्ठ पुरुषों को योग्य है कि अरियों को (साम) मिलाप (दाम) कुछ देना और (दण्ड) उनको दण्ड (भेद) आपस में उनको फोड़ देना उनसे वश में करना चाहिये ।

Правитель с лучшими из мужей должны быть в постоянной готовности дабы наказать и разбить их.

सदा स्वराज्यप्रजासेनाकोषधर्मविद्यासुशिक्षा वर्धनीयाः ।

sadā svarājyaprajāsenākoṣadharmavidyāsuśikṣā vardhanīyāḥ

सब दिन अपना राज्य, प्रजा, सेना, कोष, धर्म्म, विद्या और श्रेष्ठ शिक्षा बढ़ाते रहना चाहिये ।

Государство должно постоянно развиваться, наращивать экономическую, военную и научную мощь

यथाधर्माविद्यादुष्टशिक्षादस्युचोरादयो न वर्धेरंस्तथा सततमनुष्ठेयम् ।

yathādharmāvidyāduṣṭaśikṣādasyucorādayo na vardheraṁstathā satatamanuṣṭheyam

जिस प्रकार से अधर्म, अविद्या, बुरी शिक्षा, डाकू और चोर आदि न बढ़ें वैसा निरन्तर पुरुषार्थ करना चाहिये ।

для того, чтобы не развивались в государстве воровство, безграмотность, глупость, нищета и прочие беды, необходимо постоянно прилагать огромные усилия.

धार्मिकैः सह कदापि न योद्धव्यम् ।

dhārmikaiḥ saha kadāpi na yoddhavyam

धर्मात्माओं के साथ कभी लड़ाई न करनी चाहिये ।

Не следует сражаться с праведными.

निर्जिता अपि दुष्टा विनयेन सत्कर्त्तव्याः ।

nirjitā api duṣṭā vinayena satkarttavyāḥ

पराजित किये शत्रुओं का भी विनय के साथ मान्य करना चाहिये ।

Проявляйте снисхождение к побежденным врагам.

राजप्रजाजनाः प्राणवत् परस्परं सम्पोष्य सुखिनो भवन्तु ।

rājaprajājanāḥ prāṇavat parasparaṁ sampoṣya sukhino bhavantu

राजा और प्रजा प्राण के तुल्य एक दूसरे की पुष्टि करके सदा सुखी रहें ।

да процветают те страны, где правитель и подданные поддерживают друг друга!

कर्षिते क्षयरोगवदुभे विनश्यतः ।

karṣite kṣayarogavadubhe vinaśyataḥ

एक दूसरे को निर्बल करने से दमा रोग के समान दोनों निर्बल होकर नष्ट हो जाते हैं ।

уничтожающие друг друга чахнут и погибают.

सदा ब्रह्मचर्यविज्ञानाभ्यां शरीरात्मबलमेधनीयम् ।

sadā brahmacaryavijñānābhyāṁ śarīrātmabalamedhanīyam

सब काल में ब्रह्मचर्य और विद्या से शरीर और आत्मा का बल बढ़ाते रहना चाहिये ।

Да возрастает во все времена сила духа и тела путем образования научного и нравственного.

यथादेशकालं पुरुषार्थेन यथावत् कर्माणि कृत्वा सर्वथा सुखयितव्यम् ।

yathādeśakālaṁ puruṣārthena yathāvat karmāṇi kṛtvā sarvathā sukhayitavyam

देश काल के अनुसार उद्यम से ठीक ठीक कर्म करके सब प्रकार सुखी रहना चाहिये ।поступая правильно вы будете счастливы везде и всегда.

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11 уклад вайшьи वैश्यव्यवहारप्रकरणम्

vaiśyavyavahāraprakaraṇam

वैश्याः कथं वर्त्तेरन् ?

vaiśyāḥ kathaṁ vartteran

बनिये लोग कैसे वर्त्तें ?

Чем следует заниматься представителю варны вайшья?

सर्वा देशभाषा लेखाव्यवहारं च विज्ञाय पशुपालनक्रयविक्रयादि व्यापारकुसीदवृद्धि कृषिअकर्माणि धर्मेण कुर्युः । सब देशभाषा और हिसाब को ठीकठाक जानकर पशुओं की रक्षा लेनदेन आदि व्यवहार व्याजवृद्धि और खेती आदि कर्म धर्म के साथ किया करें ।

Вайшья занимается сельским хозяйством, торговлей, грамотен, знает языки своей страны и языки и уклад жизни соседей, поступает согласно дхармы.

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12 уклад взаимодавца कुसीदग्रहणप्रकरणम्

kusīdagrahaṇaprakaraṇam

यद्येकवारं दद्याद् गृह्‍णीयाच्च तर्हि कुसीदवृद्ध्या द्वैगुण्ये धर्मो‍ऽधिकेऽधर्म इति वेदितव्यम् ।

yadyekavāraṁ dadyād gṛh tarhi kusīdavṛddhyā dvaiguṇye dharmo iti veditavyam

जो एक बार दें लें तो व्याजवृद्धि सहित मूलधन द्विगुण तक लेने में धर्म और अधिक लेने में अधर्म होता है, ऐसा जानना चाहिये ।

знайте, что неправильно дав однажды, просить обратно вдвое больше.

प्रतिमासं प्रतिवर्षं वा यदि कुसीदं गृह्‍णीयाद्यदा समूलं द्विगुणं धनमागच्छेत्तदा मूलमपि त्याज्यम् ।

pratimāsaṁ prativarṣaṁ vā yadi kusīdaṁ gṛh samūlaṁ dviguṇaṁ dhanamāgacchettadā mūlamapi tyājyam

जो महीनेमहीने में अथवा वर्षवर्ष में व्याज लेता जाय तो भी जब मूलसहित दूना धन आ जाय फिर आगे आसामी से कुछ भी न लेना चाहिये ।

Если даже собирал свое богатство месяцы или годы, то не привязывайся к нему…

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13 путешествия на лодке नौकाविमानादिचालनप्रकरणम्

naukāvimānādicālanaprakaraṇam

त्वं नौकाश्चालयसि न वा ?

tvaṁ naukāścālayasi na vā

तू नावें चलाता है या नहीं ?

Ты можешь управлять лодкой? (чалить)

चालयामि

cālayāmi

चलाता हूं ।

да, управляю. (чалю)

नदीषु वा समुद्रे ?

nadīṣu vā samudre

नदियों में अथवा समुद्र में ?

по рекам или даже по морю?

उभयत्र चालयामि । दोनों में चलता हूं ।

я плаваю и там и там.

कस्यां दिशि कस्मिन्देशे च गच्छन्ति ?

kasyāṁ diśi kasmindeśe ca gacchanti

किस दिशा और किस देश में जाती है ?

в каких краях бываете?

सर्वासु दिक्षु पातालदेश पर्य्यन्तम् ।

sarvāsu dikṣu pātāladeśa paryyantam

सर्व दिशाओं में पातालदेश अर्थात् अमेरिका देश पर्य्यन्त ।

Во всех краях, и в другом полушарии, и вокруг света. (pātāladeśa — «подземный мир»- имеются виду США)

ताः कीदृश्यः सन्ति केन चलन्ति ?

tāḥ kīdṛśyaḥ santi kena calanti

वे नौका कैसी हैं और किससे चलती हैं ?

Каким путем они добираются туда?

कैवर्त्तवाय्वग्निजलकलावाष्पादिभिः ।

kaivarttavāyvagnijalakalāvāṣpādibhiḥ

मल्लाह वायु और अग्नि जल कलायन्त्र और भाफ आदि से ।

при помощи огня, воды, пара, железа, и так далее.

याः पुरुषाश्चालयन्ति ता ह्रस्वाः या महत्यस्ता वाय्वादिभिश्चाल्यन्ते ताश्चाश्वतरीश्यामकर्णाश्वाख्याः सन्ति ।

yāḥ puruṣāścālayanti tā hrasvāḥ yā mahatyastā vāyvādibhiścālyante tāścāśvatarīśyāmakarṇāśvākhyāḥ santi

जिनको मनुष्य चलाते हैं वे छोटीछोटी नौका और जो बड़ी होती हैं वे वायु आदि से चलाई जाती हैं उनके अश्वतरी और श्यामकर्णाश्व आदि नाम हैं ।

Люди могут приводить в движение лишь маленькие суда, для больших же нужны мощные механизмы, несущие их по воде и по воздуху. (?)

विमानादिभिरपि सर्वत्र गच्छामश्च ।

vimānādibhirapi sarvatra gacchāmaśca

और विमान आदि से भी सर्वत्र आया जाया करते हैं ।

на самолете же можно долететь куда угодно.

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14 покупки и продажи क्रयविक्रयप्रकरणम्

krayavikrayaprakaraṇam

अस्य किम्मूल्यम् ?

asya kimmūlyam

इसका क्या मूल्य है ?

Какова его цена?

पञ्च रूप्याणि ।

pañca rūpyāṇi

पांच रुपये ।

5 Рупий

गृहाणेदं वस्त्रं देहि ।

gṛhāṇedaṁ vastraṁ dehi

लीजिये पांच रुपये यह वस्त्र दीजिये ।

Возьмите эту одежду.

अद्यश्वो घृतस्य कोऽर्घः ?

adyaśvo ghṛtasya ko.rghaḥ

आजकल घी का क्या भाव है ?

Какое топленое масло сегодня свежее?

मुद्रैकया सपादप्रस्थं विक्रीणते ?

mudraikayā sapādaprasthaṁ vikrīṇate

एक रुपया से सवा सेर बेचते हैं ।

уступите четверть Рупии.

गुडस्य को भावः ?

guḍasya ko bhāvaḥ

गुड़ का क्या भाव है ?

Какой есть пальмовый сахар?

द्वाभ्यामानाभ्यामेकसेटकमात्रं ददति ।

dvābhyāmānābhyāmekaseṭakamātraṁ dadati

दो आने से एक सेर देते हैं ।

Они обя весят одинаково (?)

त्वमापणं गच्छ, एलामानय ।

tvamāpaṇaṁ gaccha elāmānaya

तू दुकान पर जा, इलायची ले आ ।

Сходи на рыгок за кардамоном.

आनीता गृहाण ।

ānītā gṛhāṇa

ले आया लीजिये ।

Возьми и принеси это.

कस्य हट्टे दधिदुग्धे अच्छे प्राप्नुतः ?

kasya haṭṭe dadhidugdhe acche prāpnutaḥ

किसकी दुकान पर दूध और दही अच्छे मिलते हैं ?

В каком магазине продается хорошее молоко и простокваша.

धनपालस्य ।

dhanapālasya

धनपाल की ।

Дханапалы

स सत्येनैव क्रयविक्रयौ करोति ।

sa satyenaiva krayavikrayau karoti

वह सत्य ही से लेनदेन करता है ।

он честный торговец.

श्रीपतिर्वणिक्कीदृशोऽस्ति ?

śrīpatirvaṇikkīdṛśo.sti

श्रीपति बनियां कैसा है ?

а что можно сказать о торговце Шрипати?

स मिथ्या कारी ।

sa mithyā kārī

वह झूठा है ।

он обманщик.

अस्मिन्संवत्सरे कियांल्लाभो व्ययश्च जातः ?

asminsaṁvatsare kiyāṁllābho vyayaśca jātaḥ

इस वर्ष में कितना लाभ और खर्च हुआ ?

каков торговый баланс этого года?

पंच लक्षाणि लाभो लक्षद्वयस्य व्ययश्च ?

paṁca lakṣāṇi lābho lakṣadvayasya vyayaśc

पांच लाख रुपये लाभ और दो लाख खर्च हुए ।

2 тысяч приход и 5 тысячи расход.

मम खल्वस्मिन् वर्षे लक्षत्रयस्य हानिर्जाता ।

mama khalvasmin varṣe lakṣatrayasya hānirjātā

मेरे तो इस वर्ष में तीन लाख की हानि हो गई ।

в этом году я потерял 3 тысячи.

कस्तूरी कस्मादानीयते ?

kastūrī kasmādānīyate

कस्तूरी कहां से लाई जाती है ?

откуда этот гибискус?

नेपालात् ।

nepālāt

नेपाल से

из Непала.

बहुमूल्यमाविकं कुत आनयन्ति ?

bahumūlyamāvikaṁ kuta ānayanti

बहुमूल्य दुशाले आदि कहां से लाते हैं ?

где вы нашли таких дорогих овец?

कश्मीरात् ।

कश्मीरात् ।

कश्मीर से ।

из кашмира.

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15 Туда и обратно गमनागमनप्रकरणम्

gamanāgamanaprakaraṇam

कुत्र गच्छसि ?

kutra gacchasi ?

कहां जाता है ?

Куда идешь?

पाटलिपुत्रकम् ।

pāṭaliputrakam

पटने को ।

В Паталипутру.

कदाऽऽगमिष्यसि ?

kadā..gamiṣyasi ?

कब आओगे ?

Когда придешь?

एकमासे ।

ekamāse

एक महीने में ।

Через месяц.

स क्व गतः ?

sa kva gataḥ ?

वह कहां गया ?

Где он ходит?

शाकमानेतुम् ।

śākamānetum

शाक लेने को ।

нужно взять еду в дорогу (?)

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16 Обустройство поля क्षेत्रवपनप्रकरणम्

kṣetravapanaprakaraṇam

क्षेत्राणि कर्षन्तु ।

kṣetrāṇi karṣantu

खेत जोतो ।

Поля должны быть вспаханы.

बीजान्युप्तानि न वा ?

bījānyuptāni na vā

बीज बोये वा नहीं ?

Семена посеяны, не так ли?

उप्‍तानि ।

uptāni

बो दिये ।

Посеяны.

अस्मिन् क्षेत्रे किमुप्‍तम् ?

asmin kṣetre kimuptam

इस खेत में क्या बोया है ?

чем засеяно наше поле?

व्रीहयः ।

vrīhayaḥ

धान ।

Рисом.

एतस्मिन्‌ ?

etasmin

इस में ?

на нашем?

गोधूमाः ।

godhūmāḥ

गेहूं ।

Пшеницей; апельсиновыми деревьями; лекарственными травами (в зависимости от контекста)

अस्मिन् किं वपन्ति ?

asmin kiṁ vapanti ?

इस खेत में क्या बोते हैं ?

Что они сеют на этом поле?

तिलमुद्‍गमाषाढकीः । तिल मूंग उड़द और अरहर ।

Сезам мунг урад и архар.

एतस्मिन् किमुप्यते ?

etasmin kimupyate ?

इसमें क्या बोया जाता है ?

Что посажено на этом поле.

यवाः ।

yavāḥ

जौ ।

Ячмень.

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17 Жатва शस्यच्छेदनप्रकरणम्

śasyacchedanaprakaraṇam

संप्रति केदाराः पक्वाः ।

saṁprati kedārāḥ pakvāḥ

इस समय खेत पक गये हैं ।

Поля уже созрели.

यदि पक्वाः स्युस्तर्हि लुनन्तु ।

yadi pakvāḥ syustarhi lunantu

यदि पक गये हों तो काटो ।

Порежьте, если готово.

इदानीं कृषीवला अन्योऽन्यकेदारान् व्यतिलुनन्ति ।

idānīṁ kṛṣīvalā anyo.nyakedārān vyatilunanti

इस समय खेती करने वाले आपस में एक दूसरे का पारापारी खेत काटते हैं ।

В это время крестьяне начинают жатву.

ऐषमे धान्यानि प्रभूतानि जातानि ।

aiṣame dhānyāni prabhūtāni jātāni

इस साल में धान्य बहुत हुए हैं ।

В этом году вырос богатый урожай

अत एवैकस्या मुद्राया गोधूमाः खारीप्रतिमा अन्यानि तण्डुलादीन्यपि किञ्चिदधिकन्यूनानि लभन्ते ।

ata evaikasyā mudrāyā godhūmāḥ khārīpratimā anyāni taṇḍulādīnyapi kiñcidadhikanyūnāni labhante

इसी से एक रुपये के गेहूं एक मन और चावल आदि अन्न भी मन से कुछ अधिक वा न्यून मिलते हैं ।

В этом году хороший урожай риса, пшеницы и многого другого.

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18 Меры молока и других продуктов, даваемых коровами

गवादिदोहनपरिमाणप्रकरणम्

gavādidohanaparimāṇaprakaraṇam

इयं गौर्दुग्धं ददाति न वा ?

iyaṁ gaurdugdhaṁ dadāti na vā

यह गौ दूध देती है वा नहीं ?

Дает ли эта корова молоко?

ददाति ।

dadāti

देती है ।

Дает.

इयं महिषी कियद्‍दुग्धं ददाति ?

iyaṁ mahiṣī kiyad dadāti

यह भैंस कितना दूध देती है ?

Сколько дает эта буйволица?

दशप्रस्थम् ।

daśaprastham

दश सेर ।

10 прастхам.

तवाऽजावयः सन्ति न वा ?

tavā.jāvayaḥ santi na vā

तेरे बकरी भेड़ हैं वा नहीं ?

Это ваши козы и овцы?

सन्ति ।

santi

हैं ।

Так и есть.

प्रतिदिनं ते कियद्‍दुग्धं जायते ?

pratidinaṁ te kiyad jāyate

नित्य कितना दूध होता है ?

Сколько они рождают каждый день?

पञ्च खार्यः ।

pañca khāryaḥ

पांच मन ।

5 ослят.

नित्यं किंपरिमाणे घृतनवनीते भवतः ?

nityaṁ kiṁparimāṇe ghṛtanavanīte bhavataḥ

प्रतिदिन कितना घी और मक्खन होता है ?

Сколько постоянно бывает масла и топленого молока?

सार्द्धद्वादशप्रस्थे ।

sārddhadvādaśaprasthe

साढ़े बारह सेर ।

12,5 мер.

प्रत्यहं कियद् भुज्यते कियच्च विक्रीयते ?

pratyahaṁ kiyad bhujyate kiyacca vikrīyate

प्रतिदिन कितना खाया जाता और कितना बिकता है ?

Сколько съедается и сколько продается в день?

सार्धद्विप्रस्थं भुज्यते दशप्रस्थं च विक्रीयते । अढ़ाई सेर खाया जाता और दश सेर बिकता है ।

2,5 съедается и 10 продается.

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19 цены, торговля क्रयविक्रयार्घप्रकरणम्

krayavikrayārghaprakaraṇam

एतद्‍रूप्यैकेन कियन्‌मिलति ?

etadruupyaikenakiyanmiliti ?

ये घी और मक्खन एक रुपया से कितना मिलता है ?

Сколько я могу купить на эти деньги?

प्रस्थत्रयम् ।

prasthatrayam

तीन सेर ।

3 меры.

तैलस्य कियच्छुल्कम् ?

tailasya kiyacchulkam ?

तैल का क्या भाव है ?

Какова цена сезамового масла?

मुद्राचतुर्थांशेनैकसेटकं प्राप्यते

mudrācaturthāṁśenaikaseṭakaṁ prāpyate

चार आने का एक सेर प्राप्‍त होता है ।

Одна мера меняется на четыре

अस्मिन्नगरे कति हट्टास्सन्ति ?

asminnagare kati haṭṭāssanti

इस नगर में कितनी दुकानें हैं ?

Сколько торговых лавок в этом городе?

पञ्चसहस्राणि ।

pañcasahasrāṇi

पांच हजार ।

пять тысяч.

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20 Взятие в долг कुसीदप्रकरणम्

kusīdaprakaraṇam

शतं मुद्रा देहि ।

śataṁ mudrā dehi

सौ रुपये दीजिये ।

Дай сотню золотых?

ददामि परन्तु कियत् कुसीदं दास्यसि ?

dadāmi parantu kiyat kusīdaṁ

देता हूं परन्तु कितना ब्याज देगा ?

дам, но сколько надо?

प्रतिमासं मुद्रार्द्धम् ।

pratimāsaṁ mudrārddham

प्रति महीने आठ आने ।

Половину в месяц.

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21 Упадок в следствие долгов उत्तमर्णाधमर्णप्रकरणम्

uttamarṇādhamarṇaprakaraṇam

भो अधमर्ण ! यावद्धनं त्वया पूर्वं गृहीतं तदिदानीं दीयताम् । हे करजदार ! जो धन तुम ने पहिले लिया था वह अब दे ।

Эй, Должник, когда вернешь то, что брал?

मम साम्प्रतं तु दातुं सामर्थ्यं नास्ति ।

mama sāmprataṁ tu dātuṁ sāmarthyaṁ nāsti

मेरा इस समय तो देने का सामर्थ्य नहीं है ।

У меня сейчас нет денег, чтобы отдать.

कदा दास्यसि ?

kadā dāsyasi ?

कब देगा ?

Когда отдашь?

मासद्वयाऽनन्तरम् ।

māsadvayā.nantaram

दो महीने के पश्चात् ।

Через два месяца.

यद्येतावति समये न दास्यसि चेत्तर्हि राजनियमान्निग्रहीष्यामि ।

yadyetāvati samaye na dāsyasi cettarhi rājaniyamānnigrahīṣyāmi

जो तू इतने समय में न देगा तो राजप्रबन्ध से पकड़ा के लूंगा ।

Если не отдашь в срок, я обращусь к радже, чтобы он разобрался с тобой!

यद्येवं कुर्य्यां तर्हि तथैव ग्रहीतव्यम् ।

yadyevaṁ kuryyāṁ tarhi tathaiva grahītavyam

जो ऐसा करूं तो वैसे ही लेना ।

Если так будет сделано, то все будет взято (?)

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22 Встреча подданных с правителем राजाप्रजासम्बन्धप्रकरणम्

rājāprajāsambandhaprakaraṇam

भो राजन् ! ममायमृणं न ददाति ।

bho rājan mamāyamṛṇaṁ na dadāti

हे राजन् ! मेरा यह ऋण नहीं देता ।

О, Раджа! Он не отдает мне долг!

यदा तेन गृहीतं तदानीन्तनः कश्चित् साक्षी वर्त्तते न वा ?

yadā tena gṛhītaṁ tadānīntanaḥ kaścit sākṣī varttate na vā

जब उसने लिया था उस समय का कोई साक्षी वर्त्तमान है या नहीं ?

Был ли свидетель тому, что он брал это?

अस्ति ।

asti

है ।

Да.

तर्ह्यानीयताम् ।

tarhyānīyatām

तो लाओ ।

Тогда приведите.

आनीतोऽयमस्ति ।

ānīto.yamasti

लाया यह है ।

Приведен.

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23 Слова свидетеля साक्षिप्रकरणम्

sākṣiprakaraṇam

भोः साक्षिन् ! त्वमत्र किञ्चिज्जानासि न वा ?

bhoḥ sākṣin tvamatra kiñcijjānāsi na vā

हे साक्षी ! तू इस विषय में कुछ जानता है वा नहीं ?

Свидетель! Знаешь ли ты кого-то здесь?

जानामि ।

jānāmi

जानता हूं ।

Знаю.

यादृशं जानासि तादृशं सत्यं वद ।

yādṛśaṁ jānāsi tādṛśaṁ satyaṁ vada

जैसा जानता है वैसा सच कह ।

Говори правду, все то, что видишь и знаешь.

सत्यं वदामि ।

satyaṁ vadāmi

सत्य कहता हूं ।

Я говорю правду.

अस्मादनेन मत्समक्षे सहस्रं मुद्रा गृहीताः ।

asmādanena matsamakṣe sahasraṁ mudrā gṛhītāḥ

इससे इसने मेरे सामने सहस्र रुपये लिये थे ।

Я своими глазами видел, что он взял 1000 золотых.

ओ भृत्य ! तं शीघ्रमानय ।

o bhṛty taṁ śīghramānaya

ओ नौकर ! उसको जल्दी ले आ ।

Слуга, уведите его быстро.

आनयामि ।

ānayāmi

लाता हूं ।

Увожу.

गच्छ राजसभायां राज्ञा त्वमाहूतोऽसि ।

gaccha rājasabhāyāṁ rājñā tvamāhūto.si

चल राजसभा में राजा ने तुझ को बुलाया है ।

Идем, правитель зовет тебя в собрание.

चलामि ।

calāmi

चलता हूं ।

Иду потихонечку.

भो राजन्नुपस्थितस्सः ।

bho rājannupasthitassaḥ

हे राजन ! वह आया है ।

О, Раджа! Он брибыл.

त्वयाऽस्य ऋणं किमर्थं न दीयते ?

tvayā.sya ṛṇaṁ kimarthaṁ na dīyate

तू इसका ऋण क्यों नहीं देता ?

Почему ты не возвращаешь ему долг?

अस्मिन् समये तु मम सामर्थ्यं नास्ति षण्मासानन्तरं दास्यामि ।

asmin samaye tu mama sāmarthyaṁ nāsti ṣaṇmāsānantaraṁ dāsyāmi

इस समय तो मेरा सामर्थ्य नहीं है परन्तु छः महीने के पीछे दूंगा ।

Сейчас у меня нет денег, но я отдам через полгода.

पुनर्विलम्बं तु न करिष्यसि ?

punarvilambaṁ tu na kariṣyasi

फिर देर तो न करेगा ?

а потом, опять не отдашь?

महाराज ! कदापि न करिष्यामि ।

mahārāj kadāpi na kariṣyāmi

महाराज ! कदापि न करूंगा ।

Великий правитель! Я так не сделаю!

अच्छ गच्छ धनपाल ! यदि सप्‍तमे मास्ययं न दास्यति तर्होनं निगृह्य दापयिष्यामि ।

accha gaccha dhanapāl yadi saptame māsyayaṁ na dāsyati tarhonaṁ nigṛhya dāpayiṣyāmi

महीने में न देगा तो इसको पकड़ के दिला दूंगा ।

Иди безнаказанно, но, если на седьмой месяц не вернешь должное, то поймаю…

अयं मम शतं मुद्रा गृहीत्वाऽधुना न ददाति ।

ayaṁ mama śataṁ mudrā gṛhītvā.dhunā na dadāti

यह मेरे सौ रुपये लेके अब नहीं देता ।

Этот, взявший у меня сотню золотых, теперь не отдает их обратно.

किं च भो यदयं वदति तत् सत्यं न वा ?

kiṁ ca bho yadayaṁ vadati tat satyaṁ na vā

क्योंजी जो यह कहता है वह सच है वा नहीं ?

Правда ли то, что он говорит?

मिथ्यैवाऽस्ति ।

mithyaivā.sti

झूठ ही है ।

Это ложь!

अहं तु जानाम्यपि नाऽस्य मुद्रा मया कदा स्वीकृताः ।

ahaṁ tu jānāmyapi nā.sya mudrā mayā kadā svīkṛtāḥ

मैं तो जानता भी नहीं कि इसके रुपये मैंने कब लिये थे ।

Я даже не знаю, когда я брал.

उभयोस्साक्षिणः सन्ति न वा ?

ubhayossākṣiṇaḥ santi na vā

दोनों के साक्षी लोग हैं वा नहीं हैं ?

Есть ли у них обоих свидетели?

सन्ति ।

santi

हैं ।

Они есть.

कुत्र वर्त्तन्ते ?

kutra varttante

कहां हैं ?

Где они?

इम उपतिष्ठन्ते ।

ima upatiṣṭhante

ये खड़े हैं ।

Стоят здесь.

अनेन युष्माकं समक्षे शतं मुद्रा दत्ता न वा ?

anena yuṣmākaṁ samakṣe śataṁ mudrā dattā na vā

इसने तुम्हारे सामने सौ रुपये दिये वा नहीं ?

Видели ли вы, что он давал ему эти 100 монет?

दत्तास्तु खलु ।

dattāstu khalu

निश्चित दिये तो हैं ।

Давал, конечно!

अनेन शतं मुद्रा गृहीता न वा ?

anena śataṁ mudrā gṛhītā na vā

इसने सौ रुपये लिये वा नहीं ?

Брал ли он эти 100 монет?

वयं न जानीमः ।

vayaṁ na jānīmaḥ

हम नहीं जानते ।

Мы не знаем.

प्राङ्विवाकेनोक्तम् ।

prāṅvivākenoktam

वकील ने कहा ।

Сказано адвокатом

अयमस्य साक्षिणश्च सर्वे मिथ्यावादिनः सन्ति ।

ayamasya sākṣiṇaśca sarve mithyāvādinaḥ santi

यह और इसके साक्षी लोग सब झूठ बोलने वाले हैं ।

Он сам и его свидетели лжецы.

कुत इदमेतेषां परस्परं विरुद्धं वचोऽस्ति ।

kuta idameteṣāṁ parasparaṁ viruddhaṁ vaco.sti

क्योंकि यह इन लोगों का वचन परस्पर विरुद्ध है ।

Потому что слова этих людей противоречивы.

यतस्त्वया मिथ्यालपितमत एव तवैकसंवत्सरपर्यन्तं कारागृहे बन्धः क्रियते ।

yatastvayā mithyālapitamata eva tavaikasaṁvatsaraparyantaṁ kārāgṛhe bandhaḥ kriyate

जिससे तूने झूठ बोला इसी कारण तेरा एक वर्ष तक बन्दीघर में बन्धन किया जाता है ।

За то, что вы солгали, вы будете в неволе 1 год.

अयमुत्तमर्णस्त्वदीयान् पदार्थान् गृहीत्वा विक्रीय वा स्वर्णं ग्रहीष्यति ।

ayamuttamarṇastvadīyān padārthān gṛhītvā vikrīya vā svarṇaṁ grahīṣyati

यह सेठ तेरे पदार्थों को लेकर अथवा बेच के अपने ऋण को ले लेगा ।

для того, чтобы рассчитаться со своими долгами в первую очередь нужно взять и продать свои товары, (вещи

अयं मदीयानि पञ्चशतानि रूप्याणि स्वीकृत्य न ददाति ।

ayaṁ madīyāni pañcaśatāni rūpyāṇi svīkṛtya na dadāti

यह मेरे पांच सौ रुपये लेकर नहीं देता ।

Этот не возвращает мне 500 Рупий.

कुतो न ददासि ?

kuto na dadāsi ?

तू क्यों नहीं देता ?

Почему же не даешь?

मया नैव गृहीतानि कथं दद्याम् ?

mayā naiva gṛhītāni kathaṁ dadyām ?

मैंने लिये ही नहीं कैसे दूं ?

Как я отдам, ежели не брал?

अयम्मम लेखोऽस्ति पश्यताम् ।

ayammama lekho.sti paśyatām

यह मेरा लेख है देखिये ।

Вот расписка.

आनय ।

ānaya

लाओ ।

Предоставь.

गृह्यताम् ।

gṛhyatām

लीजिये ।

Возьмите.

अयं लेखो मिथ्या प्रतिभाति ।

ayaṁ lekho mithyā pratibhāti

यह लेख झूठ मालूम पड़ता है ।

Эта расписка ложная.

तस्मात् त्वं षण्मासान् कारागृहे वस त्वेमे साक्षिणश्च दौ दौ मासौ तत्रैव वसेयुः ।

tasmāt tvaṁ ṣaṇmāsān kārāgṛhe vasa tveme sākṣiṇaśca dau dau māsau tatraiva vaseyuḥ

इससे तू छः महीने बन्दीगृह में रह और तेरे ये साक्षी दोदो महीने के लिये वहीं जायं ।

за это Ты отправишься в тюрьму на шесть месяцев, а твои свидетели- на два месяца.

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24 Разговор слуги и господина सेव्यसेवकप्रकरणम्

sevyasevakaprakaraṇam

भो मंगलदास ! सेवार्थं कैङ्कर्यं करिष्यषि ?

bho maṁgaladās! sevārthaṁ kaiṅkaryaṁ kariṣyaṣi ?

हे मंगलदास ! सेवा के लिये नौकरी करेगा ?

Привет тебе, о добрый слуга! Послужишь мне?

करिष्यामि ।

kariṣyāmi

करूंगा ।

Послужу.

किं प्रतिमासं मासिकं ग्रहितुमिच्छसि ?

kiṁ pratimāsaṁ māsikaṁ grahitumicchasi

प्रति महीने कितना वेतन लिया चाहता है ?

Какую плату в месяц желаешь получать?

पञ्च रूप्याणि ।

pañca rūpyāṇi

पांच रुपये ।

Пять рупий.

मयैतावद्दास्यते चेद्यथायोग्या परिचर्या विधेया ।

mayaitāvaddāsyate cedyathāyogyā paricaryā vidheyā

मैं इतना दूंगा जो तुझ से ठीकठीक सेवा हो सकेगी ।

Я сделаю все, чтобы хорошо служить Вам.

यदाहं भवन्तं सेविष्ये तदा भवानपि प्रसन्न एव भविष्यति ।

yadāhaṁ bhavantaṁ seviṣye tadā bhavānapi prasanna eva bhaviṣyati

जब मैं आपकी सेवा करूंगा तब आप भी प्रसन्न ही होंगे ।

Вы будете довольны моим служением.

मार्जनं कुरु ।

mārjanaṁ kuru

झाड़ू दे ।

Подмести?

दन्तधावनमानय ।

dantadhāvanamānaya

दातून ले आ ।

Принеси зубочистку.

स्नानार्थं जलमानय ।

snānārthaṁ jalamānaya

नहाने के लिए जल ला ।

Принесите воды для купания.

उपवस्त्रं देहि ।

upavastraṁ dehi

अंगोछा दे ।

Дайте полотенце.

आसनं स्थापय ।

āsanaṁ sthāpaya

आसन रख ।

Стойте прямо.

पाकं कुरु ।

pākaṁ kuru

रसोई कर ।

Приготовь еду.

हे सूद ! त्वयाऽन्नं व्यञ्जनं च सुष्ठु सम्पादनीयम् ।

he sūd tvayā.nnaṁ vyañjanaṁ ca suṣṭhu sampādanīyam

हे रसोइये ! तू अन्न और शाक आदि उत्तम बना ।

О, повар! Твоя еда- замечательна!

अद्य किं किं कुर्याम् ?

adya kiṁ kiṁ kuryām ?

आज क्याक्या करूं ?

Что сегодня требуется сделать?

पायसमोदकौदनसूपरोटिकाशाकानि उपव्यञ्जनादीनि चापि ।

pāyasamodakaudanasūparoṭikāśākāni upavyañjanādīni cāpi

खीर, लड्डू, चावल, दाल, रोटी, शाक और चटनी आदि भी ।

Кхир, ладду, рис, чечевицу, роти, зелень, чатни и другие блюда

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25 Разные предложения मिश्रितप्रकरणम्

miśritaprakaraṇam

नित्यप्रति किं वेतनं दास्यसि ?

nityaprati kiṁ vetanaṁ dāsyasi ?

नित्यप्रति क्या नौकरी दोगे ?

Какаова будет заработная плата?

प्रत्यहं द्वावश पणाः ।

pratyahaṁ dvāvaśa paṇāḥ

प्रतिदिन बारह पैसे ।

12 пайс в день.

वस्त्राणि श्‍लक्ष्णे पट्टे प्रक्षालनीयानि कपड़े चिकने साफ पत्थर की पटिया पर धोने चाहियें ।

Стирайте одежду на гладкой чистой каменной поверхности.

गा वनये चारय ।

gā vanaye cāraya

गायें वन में चरा ।

Пасите коров в лесу.

पुष्पवाटिकायां गन्तव्यमस्ति ।

puṣpavāṭikāyāṁ gantavyamasti

फूलों की बगीची में जाना है ।

Сходите в цветник (/сходите за сеном)

आम्रफलानि पक्वानि न वा ?

āmraphalāni pakvāni na vā ?

आम पके वा नहीं ?

Плоды манго спелые?

पक्वानि सन्ति ।

pakvāni santi

पके हैं ।

Готовы (созрели).

उपानहावानय ।

upānahāvānaya

जूते लाओ ।

Принесите обувь.


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